भारत-जापान रक्षा साझेदारी होगी और मजबूत, समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता

नई दिल्ली। भारत और जापान ने रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में हुई भारत-जापान रक्षा मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने की।

बैठक में समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सहयोग और दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-जापान संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेंगे। उन्होंने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा को एक-दूसरे से जुड़ा बताते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और निर्बाध वैध व्यापार को रणनीतिक आवश्यकता बताया।

दोनों देशों ने समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की पारस्परिक यात्राएं, संयुक्त सैन्य अभ्यास, सैन्यकर्मियों एवं विशेषज्ञों का आदान-प्रदान तथा लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाया जाएगा। बंदरगाहों के इस्तेमाल के साथ रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं में सहयोग को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बैठक में दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान के बीच जारी सैन्य अभ्यासों को महत्वपूर्ण बताया। इनमें थल सेना का धर्म गार्जियन और समुद्री अभ्यास जेमेक्स शामिल हैं। दोनों पक्षों ने आगामी भारत-जापान वायुसेना अभ्यास वीर गार्जियन-26 की तैयारियों में हुई प्रगति का भी स्वागत किया।

जापानी रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने कुमामोटो में आए भूकंप के बाद भारत की ओर से जताई गई संवेदना के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने आपात स्थिति में भारतीय नौसेना द्वारा जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के एक जहाज को दी गई चिकित्सा सहायता की भी सराहना की।

इससे पहले जापानी रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद मानेकशॉ सेंटर में उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाते हुए स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लक्ष्य के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।