छतरपुर। छतरपुर के अलीपुरा के पास सोमवार शाम एक बस उस समय अस्थायी प्रसूति कक्ष में बदल गई, जब सफर के दौरान एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची तो बस में मौजूद महिला यात्रियों ने हिम्मत दिखाते हुए साड़ी की आड़ बनाकर महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। कुछ ही देर में बस में नवजात की किलकारी गूंज उठी।
जानकारी के अनुसार, पन्ना जिले के सलेहा थाना क्षेत्र के करकरिया गांव निवासी 29 वर्षीय रेखा पत्नी देशराज चौधरी अपने परिवार के साथ ग्वालियर से गांव लौट रही थीं। गर्भावस्था के चलते परिवार यात्रा कर रहा था। झांसी में बस बदलने के बाद वे छतरपुर के लिए रवाना हुए थे।
एंबुलेंस नहीं पहुंची तो यात्रियों ने संभाली जिम्मेदारी
सोमवार शाम अलीपुरा के पास पहुंचते ही रेखा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। उनकी हालत बिगड़ती देख यात्रियों ने 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन समय पर एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी। स्थिति को देखते हुए बस में मौजूद महिला यात्रियों ने बिना देर किए प्रसव कराने में मदद शुरू कर दी।
महिलाओं ने साड़ी की आड़ बनाकर बस में ही प्रसव कराया। कुछ ही समय बाद महिला ने बच्चे को जन्म दिया। बस में मौजूद यात्रियों ने इस दौरान महिला की मदद की और मां और नवजात को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।
ड्राइवर ने सीधे अस्पताल पहुंचाई बस
प्रसव के बाद बस चालक अशोक मिश्रा और कंडक्टर मनोज कुमार तिवारी ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए बस को सीधे जिला अस्पताल ले जाने का फैसला किया। अन्य यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय उन्होंने पहले जच्चा-बच्चा को अस्पताल पहुंचाना जरूरी समझा।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसूति वार्ड के स्टाफ को सूचना दे दी गई थी। बस के अस्पताल परिसर में पहुंचते ही स्वास्थ्यकर्मियों ने महिला और नवजात को स्ट्रेचर के जरिए प्रसूति वार्ड में पहुंचाया।
अस्पताल में दोनों को भर्ती कर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। बस यात्रियों और चालक-कंडक्टर के इस मानवीय प्रयास की सराहना की जा रही है।

