जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने जेलों में बंद विचाराधीन और दोषसिद्ध कैदियों के पहचान सत्यापन तथा जरूरी सरकारी दस्तावेज तैयार कराने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रत्येक जिले में जेलों और संबंधित संस्थानों में हर माह विशेष शिविर आयोजित कराने को कहा है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने निर्देश दिया कि जिला कलेक्टरों के माध्यम से इन शिविरों की व्यवस्था की जाए और 15 दिन के भीतर प्रक्रिया शुरू की जाए। शिविरों में कैदियों के आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार या अपडेट कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के विचाराधीन बंदी या दोषसिद्ध होने मात्र से उसे या उसके परिवार को नागरिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के साथ गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने आदेश की प्रति राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति के सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण उचित समझे तो इस आदेश को देशभर की जेलों में बंद कैदियों के हित में प्रसारित कर सकता है।
इस पहल से जेलों में बंद ऐसे कैदियों को आवश्यक पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिन्हें दस्तावेजों के अभाव में सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

