जबलपुर। मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई को लेकर वर्ष 2018 से लंबित दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पहले स्वयं पौधे लगाने और उसके बाद प्रदेश में पेड़ों की कटाई एवं पौधरोपण की वास्तविक स्थिति के आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने दोनों याचिकाकर्ताओं से 25-25 फलदार पौधे लगाने और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदेश में सड़क निर्माण सहित अन्य परियोजनाओं के लिए अब तक कितने पेड़ काटे गए और उनके स्थान पर कितने पौधे लगाए गए। ऐसे में पहले वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया जाना जरूरी है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे प्रदेश में पेड़ों की कटाई और पौधरोपण से जुड़े ठोस आंकड़े जुटाएं। आंकड़े मिलने के बाद आवश्यकता होने पर वे नई याचिका दाखिल कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान प्रदेश में बड़े स्तर पर पौधरोपण किए जाने का भी उल्लेख हुआ। इंदौर में पिछले वर्ष करीब 12 लाख पौधे लगाए जाने और इसे विश्व रिकॉर्ड बताए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं जबलपुर नगर निगम ने इस वर्ष 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
कोर्ट के निर्देश के बाद अब पौधरोपण के दावों के साथ-साथ उनकी वास्तविक स्थिति और पेड़ों की कटाई के आंकड़ों का भी अध्ययन किए जाने की उम्मीद है।

