सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: हर लापता व्यक्ति की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज करना जरूरी

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने लापता व्यक्तियों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर लापता व्यक्ति के मामले में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जानी चाहिए, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि लापता व्यक्ति के मामले में FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच के नाम पर देरी नहीं की जा सकती। यह निर्देश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशों का पालन नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस प्रमुखों को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है। उन्हें यह बताना होगा कि निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

सर्वोच्च न्यायालय इससे पहले भी पुलिस को सभी लापता व्यक्तियों के मामलों में बिना किसी प्रारंभिक जांच के तत्काल FIR दर्ज करने का निर्देश दे चुका है। कोर्ट ने विशेष रूप से लापता बच्चों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय लागू करने के निर्देश दिए थे।

मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों से लापता व्यक्तियों की शिकायतों पर पुलिस की तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जवाबदेही बढ़ गई है।