नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने लाइसेंस राज के दौर में उत्पादन को हतोत्साहित करने वाली सोच में मौलिक बदलाव किया है। अब सरकार उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के माध्यम से उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है। प्रधानमंत्री ने यह बात इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम-2026 को संबोधित करते हुए कही।
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की उस नीति की आलोचना की, जिसमें जानबूझकर वस्तुओं की कमी बनाए रखने से लोगों को सरकार पर निर्भर रखने की सोच थी। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण का रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
PLI से निवेश और रोजगार को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार की सोच में आए बदलाव से आर्थिक परिणाम भी बदले हैं। उन्होंने PLI योजना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से 2.5 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है। इसके अलावा करीब 22 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा मिला, जबकि 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। योजना से 14 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की बात भी प्रधानमंत्री ने कही।
भारत को दुनिया उम्मीद की नई किरण मान रही: मोदी
प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक विकास, संसाधनों के इस्तेमाल और बढ़ते अविश्वास को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत को विकास और उम्मीद की नई किरण के रूप में देख रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।
सात प्रमुख क्षेत्रों पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सप्तधारा पर विशेष ध्यान दे रही है। इसमें विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था सहित सात प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन प्राथमिकताओं का उल्लेख उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी किया था।
उन्होंने कहा कि भारत नीति के स्तर पर अगली पीढ़ी के सुधारों, प्रशासन में बदलाव और नागरिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास के साथ देश में रोजगार और अवसरों को बढ़ावा देना है।

