MP में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कड़ा पहरा, 7 जिलों में औचक निरीक्षण के बाद कार्रवाई

भोपाल। मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। प्रदेश में चलाए जा रहे निरीक्षण अभियान के तहत सीहोर, बालाघाट, ग्वालियर, झाबुआ, अनूपपुर, रतलाम और पन्ना जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया।

मुख्य अभियंताओं की टीमों ने रेंडम आधार पर निर्माण कार्यों का चयन कर उनकी गुणवत्ता और प्रगति की जांच की। निरीक्षण दलों से प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।

निरीक्षण में कुछ निर्माण कार्य असंतोषजनक पाए गए। इसके बाद दो निर्माण एजेंसियों के खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि तीन एजेंसियों को नोटिस जारी करने को कहा गया है।

ग्वालियर में अटल गेट से बहोड़ापुर चौराहा फोरलेन निर्माण की प्रगति और गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस दिया गया। ठेकेदार मेसर्स ऋषिराज कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की गई।

इसी तरह अनूपपुर में निर्माणाधीन कोयलारी-पुरगा-मझली सड़क का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। संबंधित तत्कालीन अधिकारियों को नोटिस जारी करने के साथ ठेकेदार मेसर्स पांडे कंस्ट्रक्शन कंपनी, कोरिया के खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की गई।

झाबुआ जिले में एमपी सड़क विकास निगम के झाबुआ-जोबट-बाग-कुक्षी मार्ग के संधारण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। संबंधित ठेकेदार मेसर्स गंगोत्री झाबुआ-जोबट-कुक्षी टोलवे लिमिटेड को नोटिस जारी कर निर्धारित समय-सीमा में संधारण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षण में रतलाम जिले के बंजली-सेजावता बाइपास रोड पर निर्माणाधीन आरओबी-190 का कार्य गुणवत्तापूर्ण पाया गया। इसके लिए अनुविभागीय अधिकारी आरएन सूर्यवंशी और उपयंत्री विजय मंडलोई की प्रशंसा की गई।

इसी जिले के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, छावनी झोड़िया के निर्माणाधीन भवन का कार्य भी संतोषजनक पाया गया। इसके लिए उपयंत्री एवं अनुविभागीय अधिकारी प्रशांत जोशी की सराहना की गई।

बैठक में लोकपथ एप पर प्राप्त शिकायतों को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। सभी शिकायतों का निर्धारित चार दिवस की समय-सीमा में अनिवार्य रूप से निराकरण करने को कहा गया। अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।